~~ हरि नारायण ~~ हरि नारायण ~~
।। हरि ॐ हरि नारायण।।
आज का दिन इस बात का परिचायक है कि किसी के कुछ भी चाहने से कुछ नहीं होता। पाप करने का भरपूर अवसर देते हैं भगवान। और राक्षस अमृत ले भी ले, अमृत उनकी सभा में हो, राक्षस राज के हाथ में हो, वो उनके होठों के पास हो, तो भी भगवान उनके हाथों से छीन लेंगे और देवताओ को दे देंगे।
देवताओ को भगवान क्यों पसंद करते हैं इसलिए नहीं कि वे पूजा करते है क्योकि पूजा तो राक्षस भी करते थे, हवन करते थे, कई कई वर्षो तक तपस्या करते थे। देवताओ से भी बढ़कर करते थे। भगवान से बड़े बड़े वरदान ले के शक्तियाँ प्राप्त करते थे, उन्हें भगवान वरदान तो दे देते थे परन्तु पसंद देवताओ को ही करते थे जो की राक्षसों से कम तपस्या करते थे, फिर भी रक्षा उन्ही की करते थे, चिंतित उन्ही के लिए होते थे, क्योकि उनकी धारणा अच्छी थी, उनके कर्म अच्छे थे, उनका ध्येय अच्छा था। छीनना उनकी प्रवृत्ति नहीं थी, सबसे छीनकर स्वयं को सबसे बड़ा बनाना और सबके ऊपर राज करना उनका ध्येय नहीं था। वे सदैव सबका भला सोचते थे, सबके साथ मिलकर रहते थे, अपने साथ वालो के अधिकारों की भी बात करते थे, युद्ध की नहीं अपितु शांति की बात करते थे, अपने माता पिता का आदर करना उनकी पूजा करना उनका धर्म रहा है और यही भगवान को पसंद है।
राक्षस धूर्तता और देवता आदर एवं प्रेम का प्रतीक है। इसलिए जीवन में यदि राक्षस आपके अधिकारों को छीन भी ले तो भी विश्वास रखें कि भगवान केवल कर्म देखते हैं पूजा नहीं और भगवान आपका साथ अवश्य देंगे।
वही जाएंगे चाहे उन्हें मोहिनी अवतार भी लेना पड़े वो आपको वह अवश्य दिलाएंगे जो आपको मिलना चाहिए। प्रतीक्षा कीजिये, विश्वास कीजिये और फिर ईश्वर का मनन कीजिये।
आपकी सब चिंता आपकी नहीं है, भगवान की है |
आप भगवान को ही अपने दुःख समर्पित कर दो
आपके सभी काम बनेंगे, चिंता न करो।
जय श्री हरि मोहिनी अवतारम
~~ हरि नारायण ~~ हरि नारायण ~~
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